सुशील चौहान
उत्तराखण्ड: जसपुर विधानसभा सीट जनपद ऊधम सिंह नगर की प्रमुख सीट है । इस सीट पर पिछले 25 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी को सफलता प्राप्त नहीं हो पा रही है । इसके पीछे कई कारण हैं। लेकिन इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण है पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की गुटबाजी । भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी व कार्यकर्ता गुटों में बंटे हुए हैं । जो एक दूसरे की टांग खींचने में लगे रहते हैं । भारतीय जनता पार्टी को पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की इस खेमेबाजी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है । पार्टी के कार्यक्रमों से गुटबाजी साफ नजर आती है । जसपुर विधानसभा सीट पर जीत प्राप्त करने के लिए पहले पार्टी की गुटबाजी को दूर करना होगा । पार्टी की गुटबाजी दूर होगी , तभी उसे विधानसभा चुनाव 2027 में सफलता मिल पाएगी ।

विधानसभा 2027 के लिए भारतीय जनता पार्टी के करीब आधा दर्जन नेता टिकट प्राप्त करने की दौड़ और होड़ में लगे लगे दिखाई दे रहे हैं। टिकट पाने के लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं की लगातार परिक्रमा कर रहे हैं। लगातार देहरादून व दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं और रात-दिन एक कर रहे हैं । एक प्रकार से वे टिकट पाने के लिए भवसागर में डुबकी लगा रहे हैं और तैर रहे हैं ,लेकिन अभी उन्हें दूर-दूर तक किनारा नजर नहीं आ रहा है । जसपुर विधानसभा सीट पर विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भारतीय जनता पार्टी के टिकट को लेकर क्षेत्र के लोगों में खा़ासी चर्चा है। लोग भाजपा से टिकट मांगने नेताओं का कद नाप रहे हैं और पार्टी में उनकी पकड़ को भांप रहे हैं । लोग भाजपा के टिकट का अलग-अलग एंगल से तरह-तरह के कयास लग रहे हैं । लेकिन पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे हैं और असमंजस की स्थिति बनी हुई है । फिलहाल कई भाजपा नेता जसपुर सीट पर टिकट पाने की दौड़ में लगे हैं और टिकट पाने के लिए सिर से एड़ी के जोर लगा रहे हैं । अभी तक की स्थिति से यह अंदाज लगाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर टिकट किसको मिलेगा । जसपुर विधानसभा सीट पर टिकट देने को लेकर भाजपा पार्टी हाई कमान भी दुविधा में नजर आ रही है । कि वह टिकट दे तो किसको दे । कुल मिलाकर जसपुर सीट पर जीत हासिल करने के लिए पार्टी हाई कमान को पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं की गुटबाजी को दूर करना होगा और जसपुर विधानसभा सीट पर टिकट देने के लिए फूंक-फूंक कर कर कदम रखना होगा और पारदर्शिता बरतनी होगी। यदि पार्टी हाई कमान टिकट को लेकर अंधेरे में रही तो परिणाम फिर प्रतिकूल होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता ।