-सुशील चौहान
उत्तराखण्ड: स्वास्थ्य विभाग द्वारा
गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक करने के लिए आयोजित कैंप में महिलाओं को जागरूक और दाईयों को घर-घर प्रसव न कराने व न मानने पर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी गई । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसपुर, ऊसिंन के चिकित्सा अधीक्षक डॉ धीरेन्द्र मोहन गहलोत द्वारा सचिव स्वास्थ्य सचिन कुर्वे एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ के के अग्रवाल के निर्देशानुसार पी एच सी लालपुर, जसपुर ऊसिंन में गर्भवती महिलाओं के लिए एक जागरूकता कैम्प का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख श्रीमती अनूप कौर ने की । उनके पहुंचने पर चिकित्सा अधीक्षक द्वारा उनका स्वागत किया गया।
ब्लॉक प्रमुख ने महिलाओं को संस्थागत प्रसव के फायदे बताए और उन्हें संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक किया । चिकित्सा अधीक्षक डॉ धीरेंद्र गहलोत ने कहा कि संस्थागत प्रसव कराने पर सरकार महिला को 3400 देती हैं और स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों व कर्मचारियों द्वारा उचित उपचार एवं देखभाल की जाती है । उन्होंने कहा कि गांव-गांव में आशाओं को गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में लाने के लिये नियुक्त किया गया है । उन्होंने गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया कि महिलायें प्रसव के लिए आशाओं के साथ प्राइवेट में न जायें। उन्होंने दाईयों को भी चेतावनी दी कि घर-घर प्रसव न कराएं । यदि घर-घर प्रसव करा रही दाईंयां नहीं मानीं तो उनके खिलाफ FIR दर्ज करवाई जायेगी । उन्होंने कहा कि संस्थागत डिलीवरी कराने से महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ उन्हें आर्थिक लाभ मिलता है और HRP High risk pregnancy का पहले पता चल जाता है तो समय से सही देखभाल भी मिल जाती है। उन्होंने कहा कि संस्थागत डिलीवरी कराने के क्या-क्या फायदे हैं और प्राइवेट में प्रसव कराने से क्या-क्या नुकसान है। यह बताने के लिए ही जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया , ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरुक हो सकें। इसके अलावा ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को जागरूक करने के लिए जनता का सहयोग भी ज़रूरी है ।

ब्लॉक प्रमुख ने महिलाओं को संस्थागत प्रसव के फायदे बताए और उन्हें संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक किया । चिकित्सा अधीक्षक डॉ धीरेंद्र गहलोत ने कहा कि संस्थागत प्रसव कराने पर सरकार महिला को 3400 देती हैं और स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों व कर्मचारियों द्वारा उचित उपचार एवं देखभाल की जाती है । उन्होंने कहा कि गांव-गांव में आशाओं को गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में लाने के लिये नियुक्त किया गया है । उन्होंने गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया कि महिलायें प्रसव के लिए आशाओं के साथ प्राइवेट में न जायें। उन्होंने दाईयों को भी चेतावनी दी कि घर-घर प्रसव न कराएं । यदि घर-घर प्रसव करा रही दाईंयां नहीं मानीं तो उनके खिलाफ FIR दर्ज करवाई जायेगी । उन्होंने कहा कि संस्थागत डिलीवरी कराने से महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ उन्हें आर्थिक लाभ मिलता है और HRP High risk pregnancy का पहले पता चल जाता है तो समय से सही देखभाल भी मिल जाती है। उन्होंने कहा कि संस्थागत डिलीवरी कराने के क्या-क्या फायदे हैं और प्राइवेट में प्रसव कराने से क्या-क्या नुकसान है। यह बताने के लिए ही जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया , ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरुक हो सकें। इसके अलावा ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को जागरूक करने के लिए जनता का सहयोग भी ज़रूरी है ।
Post Views: 14